Spread the love

Ranga’s Marriage Summary Class 11 English

The story ‘Ranga’s Marriage’ is located in Hosahalli, a village in the former Mysore state, now a part of Karnataka. Ten years ago, the village didn’t have many people who knew English. The village accountant’s son, Ranga was the first one to be sent to Bangalore, to study. A decade ago, the use of English language was not widespread in the narrator’s village. That was why Ranga’s homecoming was a great event. People rushed to his doorstep announcing that Ranga who had gone to Bangalore for his studies had come back. They flocked together to have a look. The narrator, too, went and stood in the courtyard.

Seeing so many people there, Ranga came out with a smile on his face. Everybody was surprised to see that Ranga was the same as he had been six months ago, when he had first left the village. Once they realised that Ranga was unchanged physically, the crowd of people slowly disappeared. Only the narrator, Shyama continued to stand there. After everyone had gone, the narrator asked Rangappa how he was. Ranga noticed him, came near him and greeted him respectfully.

Ranga was a wordly-wise youngman. He knew when it would be to his advantage to talk to someone. He rightly assessed people’s worth. The narrator was resting in the afternoon, when Ranga came to his house with a couple of oranges in his hand. The narrator regarded him a generous, considerate fellow. He thought that it would be a fine thing to have him marry, settle down and be of service to the society. He asked Rangappa when he planned to get married. Ranga replied that he was not going to marry just then. He needed to find the right girl. She should be mature enough. Secondly, he wanted to marry a girl he admired. He was not in favour of the arranged marriages prevalent in society. If he could not get a girl of his choice, he would prefer to remain a bachelor.

The narrator felt distressed at Ranga’s decision to remain a bachelor. Ranga left after chatting for sometime. The narrator made up his mind that he would get Ranga married. He thought that Rama Rao’s niece Ratna, a pretty girl of eleven, would be the most suitable bride for him. She was from a big town and knew how to play the veena and the harmonium. She also had a sweet voice.

The next morning, the narrator went to Rama Rao’s house and told his wife to ask Ratna to fetch some buttermilk from his house. When Ratna came, he requested her to sing a song. On this Friday, she was wearing a grand saree. The narrator had sent for Ranga, too. While she was singing a song, Ranga reached the door. He was curious to see the singer and peeped in. The light coming in the room was blocked. Seeing a stranger there, Ranga stopped abruptly. She stood at a distance, her head lowered. Ranga repeatedly glanced at her. He said that his arrival had made her stop singing and offered to leave. But he didn’t leave. Ratna, overcome by shyness, ran inside.

Ranga asked the narrator who that girl was. He also expressed the hope that she was not married. The narrator noticed his excitement and said that she was married a year ago. The narrator noticed signs of disappointment on Ranga’s face. Ranga left after some time.

The next morning, the narrator went to the astrologer—Shastriji and told him to keep everything ready to read the stars. He tutored the astrologer in all that he wanted him to say. Then he escorted Ranga to the Shastri’s house. Shastriji praised astrology as an ancient science. He asked Ranga’s star. Ranga didn’t know. After making some calculations, Shastriji said that Ranga was thinking about a girl. To the narrator’s question as to who that girl was, the Shastri said that she had the name of something found in the ocean–Kamala, Pachchi, Moss, Pearl or Ratna–the precious stone.

The narrator remembered that the name of the girl in Rama Rao’s house was Ratna. He asked if there was any chance of their negotiation bearing fruit. Shastri gave a positive response. There was surprise on Ranga’s face and some happiness as well. The narrator observed that the girl was married. He noticed that Ranga’s face had fallen.

On the way, they passed by Rama Rao’s house. Ratna was standing alone at the door. The narrator went in alone. He came out in a minute and gave the news that the girl wasn’t married. He remarked that whatever Shastri told them had turned out to be true. He asked Ranga if he had been thinking of her. Ranga admitted it. So, Ranga was married to Ratna.

Years later, Rangappa invited the narrator for dinner on the occasion of three year old son Shyama’s birthday. He had named his son after the narrator. Young Shyama rushed to the narrator and put his arms round the narrator’s legs. The narrator kissed him on his check and placed a ring on his tiny little finger. The narrator also revealed that Ranga’s wife was eight months pregnant then. Thus Ranga was leading a happy married life with Ratna.

Ranga’s Marriage Summary In Hindi

कहानी ‘रंगा का विवाह’ पुराने मैसूर राज्य के एक गाँव होसाहल्ली में घटित होती है, जो कि अब कर्नाटक राज्य में है। दस वर्ष पहले गाँव में ऐसे अधिक लोग नहीं थे जो अंग्रेजी जानते थे। गाँव के लेखाकार का बेटा, रंगा, वह पहला व्यक्ति था जिसे अध्ययन करने को बंगलौर भेजा गया। एक शताब्दी पहले वर्णनकर्ता के गाँव में अंग्रेजी भाषा का प्रयोग इतना विस्तृत रूप से नहीं फैला हुआ था। यही कारण था कि रंगा को घर लौटना एक महान घटना थी। लोग यह घोषणा करते हुए रंगा के द्वार तक गए कि वह रंगा, जो अध्ययन के लिए बंगलौर गया था, अब लौट आया था। उसे देखने के लिए उन्होंने भीड़ लगा दी। वर्णनकर्ता भी गया और आँगन में खड़ा हो गया।

इतने लोगों को वहाँ देखकर, अपने चेहरे पर मुस्कान लिए रंगा बाहर आया। प्रत्येक व्यक्ति को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि रंगा बिल्कुल वैसा ही था जैसा वह 6 महीने पहले पहली बार गाँव छोड़कर जाते हुए था। एक बार जब उन्होंने यह समझ लिया कि शारीरिक रूप से रंगा में कोई परिवर्तन नहीं हुआ था, लोगों की भीड़ धीरे-धीरे गायब हो गई। केवल वर्णनकर्ता श्याम वहीं रहा। जब प्रत्येक व्यक्ति चला गया तो वर्णनकर्ता ने रंगप्पा से पूछा कि उसके क्या हाल-चाल थे। रंगा ने उसे ध्यान से देखा समीप आया तथा आदर सहित अभिवादन किया।

रंगा सांसारिक रूप से एक बुद्धिमान व्यक्ति था। वह जानता था कि किसी से बातें करना कब उसके लिए लाभदायक होगा। वह लोगों के मूल्य (महत्व) को सही प्रकार से ऑकता था। अपराहन में वर्णनकर्ता आराम कर रहा था जब अपने हाथ में कुछ संतरे लिए रंगा उसके घर आया। वर्णनकर्ता ने उसे एक उदार तथा विचारवान व्यक्ति समझा। उसने सोचा कि यह भली बात होगी कि उसका विवाह हो जाए, वह बस जाए तथा समाज की सेवा करे। उसने रंगप्पा से पूछा कि उसकी कब विवाह करने की योजना थी। रंगा ने उत्तर दिया कि वह उसी समय विवाह नहीं करने वाला था। उसे सही लड़की ढूंढने की आवश्यकता थी। वह काफी परिपक्व होनी चाहिए। दूसरे, वह ऐसी लड़की से विवाह करना चाहता था जिससे वह अत्यधिक प्रेम करता हो। वह समाज में प्रचलित व्यवस्थित किए गए विवाह के पक्ष में नहीं था। यदि वह अपनी इच्छानुसार लड़की नहीं पा सका तो वह कुँवारा रहना पसंद करेगा।

रंगा के कुँवारे रहने के निर्णय पर वर्णनकर्ता ने व्यथित (दुःखी) महसूस किया। कुछ देर बातें करके रंगा चला गया। वर्णनकर्ता ने यह पक्का विचार (इरादा) कर लिया कि वह रंगा का विवाह कराएगा। उसने सोचा कि रामाराव की ग्यारह वर्षीया सुंदर भतीजी, रत्ना उसके लिए सबसे उपयुक्त दुल्हन होगी। वह एक बड़े नगर की थी तथा वीणा एवं हारमोनियम बजाना जानती थी। उसका कंठ भी मधुर था।

अगले दिन, वर्णनकर्ता रामाराव के घर गया तथा उसकी पत्नी से बोला कि वह उसके घर से छाछ (लस्सी) लाने के लिए रत्ना को भेज दे। जब रत्ना आई तो उसने उससे एक गीत गाने की याचना (प्रार्थना) की। इस शुक्रवार को वह एक शानदार साड़ी पहने हुए थी। वर्णनकर्ता ने रंगा को भी बुलवा लिया था। जब वह गाना गा रही थी, तो रंगा द्वार पर पहुँचा। वह गायक को देखने को उत्सुक था अतः उसने भीतर झाँककर देखा। कमरे में आता हुआ प्रकाश अवरुद्ध हो गया। वहाँ एक अजनबी को देखकर रत्ना अचानक रुक गई। वह अपना सिर नीचे को झुकाए, कुछ दूरी पर खड़ी रही। रंगा बार-बार तिरछी नज़र से उसे देखता रहा। उसने कहा कि उसके आगमन से उसने गाना बंद कर दिया था तथा उसने जाने की पेशकश की। किंतु वह गया नहीं। लज्जा से पीड़ित होकर रत्ना भीतर दौड़ गई।

रंगा ने वर्णनकर्ता से पूछा कि वह लड़की कौन थी। उसने यह आशा भी प्रकट की कि वह विवाहित न हो। वर्णनकर्ता ने उसकी उत्सुकता को ध्यान से देखा तथा कहा कि एक वर्ष पहले उसका विवाह हो गया था। वर्णनकर्ता ने रंगा के चेहरे पर निराशा के भाव देखे। कुछ समय उपरांत रंगा चला गया।

अगले दिन, प्रातः ही वर्णनकर्ता ज्योतिषी-शास्त्री जी, के यहाँ गया तथा उसे ग्रहों का अध्ययन करने के लिए प्रत्येक वस्तु को तैयार रखने को कहा। उसने ज्योतिषी को वह सब कहने के लिए सिखाया-पढ़ाया जो कि वह उससे कहलवाना चाहता था। फिर वह रंगा को शास्त्री के घर लेकर आया। शास्त्री जी ने ज्योतिषशास्त्र की एक प्राचीन विज्ञान के रूप में प्रशंसा की। उसने रंगा की राशि पूछी। रंगा यह नहीं जानता था। कुछ गणना करने के उपरांत शास्त्री जी ने कहा कि रंगा एक लड़की के विषय में सोच रहा था। वर्णनकर्ता के इस प्रश्न के उत्तर में कि वह लड़की कौन थी, शास्त्री ने कहा कि उसका नाम समुद्र में पाई जाने वाली वस्तु पर था–कमला, पच्छी, काई, मोती या रत्न-कीमती पत्थर।

वर्णनकर्ता को याद था कि रामाराव के घर में जो लड़की थी, उसका नाम रत्ना था। उसने पूछा कि क्या उनकी बातचीत सफल होने का कोई अवसर था। शास्त्री से सकारात्मक उत्तर दिया। रंगा के चेहरे पर आश्चर्य एवं कुछ प्रसन्नता भी थी। वर्णनकर्ता ने कहा कि लड़की विवाहित थी। उसने देखा कि रंगा का चेहरा उतर गया।

रास्ते में, वे रामाराव के घर के पास से गुजरे। रत्ना अकेली ही द्वार के पास खड़ी थी। वर्णनकर्ता अकेला ही भीतर गया। वह एक मिनट में बाहर आया तथा उसने समाचार दिया कि लड़की विवाहित नहीं थी। उसने टिप्पणी की कि शास्त्री ने उन्हें जो कुछ बताया था वह सत्य निकला। उसने स्वा से पूछा कि क्या वह उस लड़की के विषय में सोच रहा था। रंगी ने यह बात स्वीकार कर ली। अतः रंगा का विवाह रत्ना से किया गया।

कई वर्ष उपरांत, अपने तीन वर्षीय पुत्र श्याम के जन्मदिन पर रंगप्पा ने वर्णनकर्ता को रात्रि भोज पर आमंत्रित किया। उसने अपने पुत्र का नाम वर्णनकर्ता के नाम पर रखा था। छोटा श्याम वर्णनकर्ता के पास दौड़कर आया और उसकी टाँगों के गिर्द अपने बाजू रखे। वर्णनकर्ता ने उसके गालों को चूमा तथा उसकी छोटी उँगली में एक अंगूठी पहना दी। वर्णनकर्ता ने यह भी प्रकट किया कि तब रंगा की पत्नी को आठ महीने का गर्भ था। इस प्रकार रंगा, रत्ना के साथ सुखी विवाहित जीवन व्यतीत कर रहा था।

<!– –>

Spread the love


Comments are closed